Friday, 17 January 2020

तुम से किस मर्ज़ की आखिर वह दवा माँगेगा।

दर्दअंगेज़ हैं अफ़साने मुहब्बत के मेरे
जो भी सुन लेगा मुहब्बत से पनाह मांगेगा

जिस के आंगन में सभी चांद सितारे होंगे
वह भला कौन सा मिट्टी का दिया माँगेगा

तेरे चेहरे की यह रंगत न उसे भाएगी
तेरा महबूब जो है इस से सिवा माँगेगा

जीते जी तुम ने जिसे मुर्दा बना डाला है
तुम से किस मर्ज़ की आखिर वह दवा माँगेगा

पत्थरों से नहीं जिस को अक़ीदत होगी
वह तो बस एक खुदा से ही शिफा माँगेगा


राशिद अमीन

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