मुश्किलें हैं बहुत आदमी के लिए
जी रहे हैं सभी हर खुशी के लिए
सपने बुनता रहा मुश्किलों में भी जो
हम भी तो कुछ करें उस दुखी के लिए
हम को तस्लीम है ख़ौफ़ का दौर है
खून है, ज़ुल्म है, जब्र का दौर है
हम जो हालात से खुद न लड़ पायेंगे
खुद भी तड़पेंगे और सब को तड़पायेंगे
डर के आलम में जीना गवारा न कर
बुज़दिली को कभी तू गवारा न कर
हर सितम यूँही हंस कर के सहते नहीं
चैन से ऐसी हालत में रहते नहीं
ड़र तुम्हारी तरक़्क़ी में दीवार है
ड़र तुम्हारे लिए बाइस ए आर है
ड़र तुम्हारे लिए ज़ख़्म है ख़ार है
ड़र से लड़ लो अगर जीत से प्यार है
हम ने माना कि सब कुछ यह आसां नहीं
हम ने माना कि क़दमों में ज़ंजीर है
ड़र के कांटों को हिम्मत से कुचलो अगर
तेरी हिम्मत ही सब कुछ है तक़दीर है
हौसलों को जवां रखना होगा तुम्हें
हिम्मतों को जवां रखना होगा तुम्हें
डर की तुम को ज़रा सी भी परवाह न हो
हार का भी तुम्हें कोई सदमा न हो
जंग होती है पहले सुलह के लिए
हार होती है पहले फ़तह के लिए
तुम शिकस्तों के ख्यालात को छोड़ दो
बे तुके से सवालात को छोड़ दो
तुम लड़ो बस सभी की खुशी के लिए
तुम लड़ो बस हर इक बे बसी के लिए
तुम लड़ो बस सभी के दुखों के लिए
तुम लड़ो बस हर इक आदमी के लिए