Tuesday, 4 September 2018

..मेरे हम नफ़स वह प्यार दे

मैं हूँ मुंतज़िर जिस प्यार का मेरे हम नफ़स वह प्यार दे
मेरे ख़्वाब सारे कुचल गए मेरे दिल को कुछ तो क़रार दे

~राशिद अमीन मलाई

Thursday, 23 August 2018

ड़र से लड़ लो अगर जीत से प्यार है।

मुश्किलें  हैं  बहुत   आदमी  के  लिए
जी  रहे  हैं  सभी  हर  खुशी  के  लिए
सपने बुनता रहा मुश्किलों  में  भी  जो
हम भी तो कुछ करें उस दुखी के लिए

     हम को  तस्लीम है  ख़ौफ़  का  दौर   है
     खून है,   ज़ुल्म  है,  जब्र   का   दौर   है
      हम जो हालात से  खुद  न  लड़  पायेंगे
      खुद भी तड़पेंगे और सब को तड़पायेंगे

डर के आलम में जीना गवारा न कर
बुज़दिली को कभी तू  गवारा  न  कर
हर सितम यूँही हंस कर के सहते नहीं
चैन  से  ऐसी  हालत  में   रहते   नहीं

           ड़र तुम्हारी  तरक़्क़ी   में   दीवार  है
           ड़र  तुम्हारे   लिए   बाइस ए आर  है
           ड़र  तुम्हारे  लिए  ज़ख़्म  है  ख़ार  है
           ड़र से लड़ लो अगर जीत से प्यार है

हम ने माना कि सब कुछ यह आसां नहीं
हम  ने   माना  कि  क़दमों  में  ज़ंजीर  है
ड़र के कांटों को हिम्मत से कुचलो अगर
तेरी हिम्मत ही  सब  कुछ  है  तक़दीर  है

          हौसलों   को   जवां   रखना  होगा  तुम्हें
          हिम्मतों को   जवां   रखना   होगा   तुम्हें
          डर की तुम को ज़रा सी भी परवाह न हो
           हार  का  भी   तुम्हें  कोई  सदमा  न  हो

                 जंग  होती  है  पहले  सुलह  के  लिए
                 हार  होती  है  पहले  फ़तह  के  लिए
                तुम शिकस्तों के ख्यालात को छोड़ दो
                 बे  तुके  से  सवालात  को   छोड़   दो

तुम लड़ो बस सभी की खुशी के लिए
तुम लड़ो बस हर इक बे बसी के लिए
तुम लड़ो बस सभी के दुखों के लिए
तुम लड़ो बस हर इक आदमी के लिए


Tuesday, 31 July 2018

मुख़्तलिफ़ अशआर (1)

1.
भला सोचा है जब जब भी किसी का हम ने ऐ  राशिद
बहुत ही दुख मिला हम को बुरा सब का जवाब  आया
इनायत और करम जिन पर नवाज़िश भी मुकम्मल थी
उसी ने  दुख  जो  पहुँचाया  तो   रोना  बेहिसाब  आया

2.

हर एक को यादों में समा भी तो नही सकते
बस याद तुम्हारी है जो हर याद पे  भारी  है
तुम रूठ चुके हमसे यह  बात  सही  लेकिन
हम याद भी  आते  हैं  यह  बात  तुम्हारी  है

3.

लिखना है तुम्हें जो कुछ वह शौक़ से लिख ड़ालो
यह  बात  मगर लिखना  कि  तू  इश्क़  हमारा  है
हर  ज़ख़्म  छुपा   लेंगे  हर  दर्द   को   सह   लेंगे
तेरे  प्यार  की  ख़ातिर  तो  हर  चीज़  गवारा   है

शांति की फुहार लाएं।

समाज ऐसा बनायें हम सब अंधेरे उस में जगह न पायें
दुखों का उस में गुज़र भी न हो,सुखों की ऐसी क़तार लायें

ग़रीब लोगों की हालतों पर नज़र भी हम को ही रखनी होगी
हम उनके घर को करेंगे रौशन हम ऐसा मिल के दुलार लायें

ज़ुल्म है और अनारकी है हर एक बन्दा दुखी दुखी है
रहम की कोई अपील लायें, न्याय की हम गुहार लायें

नफ़रतों की आग में भी हर एक इंसां झुलस रहा है
प्यार की हम नवेद लायें, चाहतों की बहार लायें

खुदा करे सब की बस्तियों पर मुहब्बतों की ही बारिशें हों
दहशतों की न आग बरसे,शांति की फुहार लायें

भाई बन कर रहें सभी हम कोई सियासत न हम को तोड़े
हम ऐसा बेहतर समाज लायें, हम ऐसा सुंदर सा प्यार लायें

~राशिद अमीन मलाई