1.
भला सोचा है जब जब भी किसी का हम ने ऐ राशिद
बहुत ही दुख मिला हम को बुरा सब का जवाब आया
इनायत और करम जिन पर नवाज़िश भी मुकम्मल थी
उसी ने दुख जो पहुँचाया तो रोना बेहिसाब आया
2.
हर एक को यादों में समा भी तो नही सकते
बस याद तुम्हारी है जो हर याद पे भारी है
तुम रूठ चुके हमसे यह बात सही लेकिन
हम याद भी आते हैं यह बात तुम्हारी है
3.
लिखना है तुम्हें जो कुछ वह शौक़ से लिख ड़ालो
यह बात मगर लिखना कि तू इश्क़ हमारा है
हर ज़ख़्म छुपा लेंगे हर दर्द को सह लेंगे
तेरे प्यार की ख़ातिर तो हर चीज़ गवारा है
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