समाज ऐसा बनायें हम सब अंधेरे उस में जगह न पायें
दुखों का उस में गुज़र भी न हो,सुखों की ऐसी क़तार लायें
ग़रीब लोगों की हालतों पर नज़र भी हम को ही रखनी होगी
हम उनके घर को करेंगे रौशन हम ऐसा मिल के दुलार लायें
ज़ुल्म है और अनारकी है हर एक बन्दा दुखी दुखी है
रहम की कोई अपील लायें, न्याय की हम गुहार लायें
नफ़रतों की आग में भी हर एक इंसां झुलस रहा है
प्यार की हम नवेद लायें, चाहतों की बहार लायें
खुदा करे सब की बस्तियों पर मुहब्बतों की ही बारिशें हों
दहशतों की न आग बरसे,शांति की फुहार लायें
भाई बन कर रहें सभी हम कोई सियासत न हम को तोड़े
हम ऐसा बेहतर समाज लायें, हम ऐसा सुंदर सा प्यार लायें
~राशिद अमीन मलाई
No comments:
Post a Comment